Monday, September 05, 2011

कव्वाली: बहूतोने कहा है के प्यार न कर

कव्वाली: बहूतोने कहा है के प्यार न कर प्यार न कर

बहूतोने कहा है के प्यार न कर प्यार न कर
खाली हो जाता है दिल, तू सिसकियां न भर
बहूतोने कहा है के प्यार न कर प्यार न कर

इस दुनिया में हसीनाऐ रहेती है
नुर एक हुस्न की दौलत बनती है
कुदरत ने उन्हे बनवाया बडी नजाकत से
जैसे की फुल बनते है नाजूक कलीयोसें
इत्र जैसे सुगंध पिरोता है
हसीन चेहेरे भी वैसे घुमते है
मगर पथ्थर दिलवालें उन्हे देखतेही जाते है मर
इसलीए बहूतोने कहा है के प्यार न कर प्यार न कर

उनकी जुल्फ जरा भी तूम देखें एकबार
खुदा न करें वो लिपट लें तुम्हें आखरीबार
वो हसीन हसीं बो मोती लिए मुस्कूराना
क्या मजाल है किसीकी देखके आपेमें रहेना
दुनीया की किसी भी हसीना को आप जो देखें
इतराती हुऐ वो नजर न आयीं तो आप क्या देखें?
अपना खुदका दिल चोरी हो जाने का तब लगता है डर
बहूतोने कहा है के प्यार न कर प्यार न कर

कितनेही शौक है इनके निगाहो मै पलते
सज-सवंरके मर्द को मारने तैयार रहेते
आदमी एकाध बार खंजर से भी बच जाऐ
मगर इनकी तेज निगाह से खडे खडे ही मर जाऐं
ऐसा बर्ताव इनका रहेता है तूम जानो अभी
इनके बहकावें में ना आना मेरे ए दोस्त कभी
सच्चा प्यार नसीब होने का हमेशा रहेता है डर
इसलीए बहूतोने कहा है के प्यार न कर प्यार न कर

- पाषाणभेद (दगडफोड्या)
०५/०९/२०११

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